आत्मजा

आत्मा से जन्मी  आत्मजा हो तुम।
मेरी रूह, मेरी जान , मेरी जिस्म का हिस्सा हो तुम।
तुम्हे रुला के मैं रोती हु...
तुम्हे हँसा के मैं हस्ती हु।
कैसे कहूं कि तुमसे कितना प्यार है?
तुझसे ही मेरी जीवन की आधार है।
पहली बार मुझे माँ बनाया तुमने।
अपनी अधबोली से मुझे हसाया तुमने।
माफ कर दोगी मुझे...जब तुम माँ बन जाओगी..
यही सोच के तेरे साथ मैं बुरी बन जाती हूं।
सच कहते है लोग..बेटियाँ तो रानियां होती है।
माँ के हर दुःख-दर्द की कहानियाँ होती है।

Comments

Popular posts from this blog

Health Benefits of Dalchini

कविता