विचारसागर

इंसान घर बदलता है..कपड़े बदलता है..दोस्त बदलता है..
यहाँ तक कि कभी - कभी तो अति हो जाती है अपने रिश्ते भी बदल लेता है। पर अगर वो कुछ नहीं बदलता तो अपने आप को..अपने नजरिये को।

जब मंज़िल ना मिले तो ..
नजरिया बदल के देख लो..
शायद कुछ ऐसा दिख जाए जो ..
पहले ना देखा हो..!!!

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